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मानवता

                   बहुत दिलदार होते हैं वो लोग             जो खुद से ज़्यादा दूसरों की फ़िक्र करते हैं,              उन्हें फ़र्क़ नहीं पड़ता कोई प्रसिद्धि से                ना ही वो कहीं अपना ज़िक्र करते हैं,                  हर कोई बन जाये उन जैसा तो                सबकी ज़िन्दगी हो जाएगी खुशहाल,       ऐसे ही कायम कर पाएँगे हम दुनिया पर मानवता की नई मिसाल।। मानवता/इंसानियत वही होती है जिसमें मनुष्य खुद के लिए नहीं बल्कि औरों के हित के विषय में सोचते हैं। मानवता जैसा भाव रखने वाले लोग ही इस समाज को एक-दूसरे के संग जोड़कर रखते हैं। हर एक व्यक्ति को अपने दिल में इंसानियत यानि मानवता जैसे भाव रखने चाहिए। मानवता ऊचाईयों का सबसे पहला कदम माना गया है, इसमें मन की ख़ुशी शामिल होती है, कोई दिखावा नहीं होता।   इस दुनिया में बहुत से ऐस...

निर्धन वयक्तियों का लाॅकडाउन

       जिस बाज़ार में लगती थी रौनक हर दिन हर रात...                  इन दिनों सूना वो बाज़ार हो गया!       क्या अजब असर दिखाया इस महामारी ने अपना..       यहॉं बड़े से बड़ा कर्मचारी भी बेरोज़गार हो गया!! कोरोना वायरस एक भयावह स्थिति पर है, जिसके कारणवश एक खतरनाक नाम "लॉकडाउन" का लगाना आवशयक हो जाता है। लॉकडाउन का नाम सुनते ही सब सहम जाते हैं। सबके मन में इसका अब डर बैठ गया है।   पिछले वर्ष कोविड-19 आने के बाद पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया था। ठीक उसी प्रकार, इस वर्ष भी '2021' में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के आने पर भी लॉकडाउन लगाया गया है। लॉकडाउन के लगने से उत्पन्न आर्थिक विषमताएँ उन लोगों को सबसे ज़्यादा प्रभावित करती हैं, जो शायद इस महामारी की चपेट में आने से तो बच जाएंगे, लेकिन अपनी रोज़मर्रा की आवशयक ज़रूरतों का पूरा न हो पाना, उनके लिए अलग मुश्किलें खड़ी कर देता है। पिछले लॉकडाउन में जिस तरह निर्धन लोगों को ही सब मुश्किलों का सामना करना पड़ा था, इस बार भी यही लोग ही आर्थिक तंगी की चपेट म...

मज़हब नही सिखाता आपस में बैर रखना

           धर्म, मज़हब, पंथ तो बस शब्द हैं                   असल में भाईचारा क़ायम रहना ज़रूरी है           मिल जुल कर रहने में ही सबका भला है इसलिए हर नफ़रत में प्यार और मिठास का होना ज़रूरी है। इस पूरे संसार में अनेक धर्म (मज़हब), सम्प्रदाय और पंथ प्रचलित हैं, परंतु कोई भी धर्म, एक-दूसरे से ईर्ष्या, द्वेष और वैर भाव रखने का सन्देश नहीं देता है। हर एक धर्म आपसी मेल-मिलाप तथा भाईचारे का ही उपदेश देता है। मज़हब या धर्म कोई कच्चे धागे की डोर नहीं है, वह किसी के स्पर्श मात्र से टूटकर बिखर नहीं सकती, यह तो अपने-आप में ही इतनी पवित्र, महान और शक्तिशाली है कि इनका स्पर्श पाकर ही अपवित्र भी पवित्र बन जाया करता है।  हर मज़हब के पैगम्बर या धर्म-स्थापक की शिक्षाएं, अपने भक्तों को मानवीय प्रेम का पाठ पढ़ाती हैं। गीता, क़ुरान, गुरु ग्रन्थ साहिब, बाइबिल आदि विभिन्न ग्रंथों में शांति एवं प्रेम से जीवन जीने की शिक्षाएँ दी गयी हैं।  आज के समय में भी ऐसे बहुत से लोग हैं जो भाईचारे में विश्वास रखते हैं और ...

सादा जीवन, उच्च विचार

               सादा जीवन, उच्च विचार                          जीवन के हैं २ मूल आधार।        जिस किसी ने यह मन्त्र अपनाया                          भविष्य अपना उज्जवल बनाया।।  एक समय था जब सभी लोग बिना किसी दिखावे के ही एक-दूसरे की मदद करने के लिए हर वक़्त आगे रहते थे। लेकिन अगर आज के युग की बात करें तो पूरी दुनिया ही दिखावे और कृत्रितमा पर कायम है। आज तड़क-भड़क को ही विशेष एवं अधिक महत्त्व दिया जाता है।  चाहे वो तन पर पहनने वाले कपड़े हों, या घरों-दफ्तरों के उपकरण, तथा उपयोगी सामान हों, सभी जगह प्रदर्शनप्रियता के कारण कोरी चमक-दमक का बोलबाला है। इन्हीं सबके चलते सादगी और सादे लोगों को अच्छी नज़र से नहीं देखा जाता है। इसी का दुष्परिणाम पूरे समाज के नैतिक पतन, भ्रष्टाचार और आचारहीनता के रूप में सामने आ रहा है।  'सादा जीवन, उच्च विचार' अर्थात् सादगी भरा रहन-सहन, खान-पान, और अन्य प्रकार के जीवन...

सकारात्मक सोच

     एक अच्छा दिन बिताने के लिए बस                          एक सकरात्मक सोच की ज़रूरत है, असल में ऐसी सोच तो इंसान का जीवन बना देती है!!                      जहाँ इंसान का हौसला ढलना शुरू होता है, वहाँ सकारात्मकता उस शख्स की हिम्मत बढ़ा देती है!! सकारात्मकता!! हर एक इंसान के लिए उसके ज़िन्दगी के हर मोड़ पर, सकारात्मक सोच का होना बहुत ही ज़रूरी होता है। यह इंसान को जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करती है। जब हमारे दिमाग में हमेशा अच्छी बातें चलती हैं, हमारा मन साफ़ होता है और अगर हम अच्छी और सकारात्मक सोच रखते हैं, उससे हमारा हर काम को करने में मन लगता है और फिर उससे हमे बहुत ख़ुशी भी मिलती है। आपका विचार आपके जीवन को आकार देता है। वह आपके कार्यों, निर्णयों, प्रतिक्रियाओं, रिश्तों और व्यवहार को प्रभावित करते हैं।  हर छोटी या बड़ी, आसान या जटिल समस्या का हल होता है। बस ज़रूरत है तो एक सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास, कड़ी मेहनत और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की,...

बढ़ता अकेलापन

             क्या ज़िन्दगी जी रहे हैं लोग आजकल,        सबके साथ होने पर भी अकेलापन महसूस होता है...                 पीछे होता है साथ परिवार का भी,           फिर भी इंसान अकेलेपन के नाम पर रोता है... आप सब में से कितने लोग होंगे जो आज अपनी ज़िन्दगी में अकेलापन महसूस करते होगे। आज के समय में यह महसूस करना आम हो गया है। सबके बीच में रहकर भी हम कई बार खुद को अकेला-सा मानते हैं। अकेलेपन से ही डिप्रेशन बढ़ता है। सोशल मीडिया पर सब खुश नज़र आते हैं, पर असल ज़िन्दगी में सब अपने आप को मुश्किलों, परेशानिओं से घिरा हुआ पाते हैं।  इतनी व्यस्त दिनचर्या, मनोरंजन के अनेक बढ़ते साधन और वर्चुअल दुनिया के परस्ते पैरों के नीचे इंसान का अकेलापन बढ़ता जा रहा है। आज हम किसी के साथ दुःख तो क्या, सुख भी नहीं बाँटना चाहते। शायद यही वजह है कि हमारे पड़ोस वाले घर में कौन रह रहा है, यह जानना तक ज़रूरी नहीं समझते। हो सकता है सैंकड़ों लोगों के बीच भी आपको अकेलापन महसूस होता होगा, ये कोई बड़े-बुज़ुर्गो...

किसानों की आज की दशा

           समझ जाओगे किसान का दर्द, उनकी पीड़ा,   एक बार खेतों में हल चलाकर, उनकी मुश्किलों का सामना करके तो देखो,                         किसी ज़मीन के टुकड़े में,                    अनाज उगाकर तो कभी देखो,          कभी जून की गर्मी में तो कभी दिसंबर की ठंड में,               खेतों में एक बार जा कर तो देखो!! भारत किसानों की भूमि है, भारत देश कृषिप्रधान देश है। यहाँ किसानों का बहुत मह्त्वपूर्ण स्थान है। किसानों को अन्नदाता माना जाता है। अगर हमारे देश में किसान न होंगे, तो हम भूखे मर जाएँगे। भारत की नींव किसानों पर ही टिकी है। वे गर्मी, सर्दी, बरसात आदि सब मौसमों में लगातार काम करते हैं और हमारे लिए अनाजों का उत्पादन करते हैं। किसान बहुत मेहनती होते हैं। जिस तरह हमारे देश की सीमा पर सैनिक न होंगे तो हमारे दुश्मन हम पर हमला कर सकते हैं, उसी प्रकार अगर किसान नहीं होंगे तो खेती नहीं होगी...