बढ़ता अकेलापन
क्या ज़िन्दगी जी रहे हैं लोग आजकल,
सबके साथ होने पर भी अकेलापन महसूस होता है...
पीछे होता है साथ परिवार का भी,
फिर भी इंसान अकेलेपन के नाम पर रोता है...
आप सब में से कितने लोग होंगे जो आज अपनी ज़िन्दगी में अकेलापन महसूस करते होगे। आज के समय में यह महसूस करना आम हो गया है। सबके बीच में रहकर भी हम कई बार खुद को अकेला-सा मानते हैं। अकेलेपन से ही डिप्रेशन बढ़ता है। सोशल मीडिया पर सब खुश नज़र आते हैं, पर असल ज़िन्दगी में सब अपने आप को मुश्किलों, परेशानिओं से घिरा हुआ पाते हैं।
इतनी व्यस्त दिनचर्या, मनोरंजन के अनेक बढ़ते साधन और वर्चुअल दुनिया के परस्ते पैरों के नीचे इंसान का अकेलापन बढ़ता जा रहा है। आज हम किसी के साथ दुःख तो क्या, सुख भी नहीं बाँटना चाहते। शायद यही वजह है कि हमारे पड़ोस वाले घर में कौन रह रहा है, यह जानना तक ज़रूरी नहीं समझते। हो सकता है सैंकड़ों लोगों के बीच भी आपको अकेलापन महसूस होता होगा, ये कोई बड़े-बुज़ुर्गों या गरीबों को होने वाली मानसिक समस्या नहीं है, बल्कि आज के आधुनिक युग की समस्या बन चुकी है।
अकेला होना...दुनिया से दूर होना नहीं होता,
अकेला होना तो...वास्तव में स्वतन्त्र रहना होता है...
पूरी वर्चुअल दुनिया ये भ्रम ज़रूर देती है कि आप बहुत व्यस्त हैं और दुनिया के किसी भी कोने में बैठा हुआ इंसान बिना जान पहचान के आपका दोस्त हो सकता है, लेकिन असल जीवन में वे सारे लोग इस दुनिया की तरह ही वर्चुअल सिद्ध होते हैं और इसके परिणामस्वरूप पैदा होता है- अकेलापन और डिप्रेशन।
आज की जितनी भी युवा पीढ़ी है, वे सब खुद को आज़ाद और बिंदास साबित करने के चक्कर में लगातार अकेलेपन की तरफ बढ़ रहे हैं। विशेषयज्ञों की मानें तो अकेलेपन का जो ट्रेंड चल रहा है, वह हमें भयावह मोड़ पर पहुँचा रहा है।
असल में दुनिया की सबसे बड़ी बात यह है...कि...
खुद को अच्छे से जानना है...
कुछ समय पहले तक बच्चे अपने दादा-दादी और नाना-नानी की प्यारी-प्यारी कहानियों को सुनकर बड़े होते थे। अपने बड़े-बुज़ुर्गों का अनुभव हर कदम पर हमारी सहायता करता था। लेकिन आजकल के बच्चे इन सब चीज़ों को बेकार मानते हैं। लेकिन उन्हें ये नहीं पता होता की ये ज़िन्दगी के सबसे अहम पल हुआ करते थे।
इस तकनीकी दौर में- युवा पीढ़ी यह नहीं समझ पाती की चाहे उनकी सोशल नेटवर्किंग दोस्तों से भरी पड़ी है, परंतु वास्तविक दुनिया में उनके पास कोई अच्छा और सच्चा दोस्त नहीं होता। अकेले होने की स्थिति में उनसे कोई भी उसका अकेलापन बाँटने नहीं आएगा।
बहुत ही अजीब से इस संसार के मेले हैं,
वैसे तो दिखती हर तरफ भीड़ है..
लेकिन वास्तव में फिर भी सब अकेले हैं!!
आज हर कोई खुद को अकेला महसूस करता है। कामकाज में उलझे रहना, सफलता के लिहाज़ से बेहतर है, लेकिन अपने आप को समय न देना, दोस्तों के साथ बाहर घूमने न जाना भी अकेलेपन का नतीजा है। खुद को समय देना सबसे ज़्यादा ज़रूरी है, इससे हम खुद को अच्छे से जानते-पहचानते हैं और फिर खुद से प्यार करने लगते हैं। परिवार के साथ वक़्त बिताना, उनसे बातें करना भी ज़रूरी है। वर्चुअल दुनिया आपको कुछ समय के लिए सबका साथ देने का आभास तो करवाती है, लेकिन यह एकसाथ बैठकर बातें और हँसी-मज़ाक करने के मौके नहीं देती। इसीलिए दूसरों के साथ वक़्त बिताने से, हर काम को हँसी-ख़ुशी करने से, हर स्थिति को मुस्कुराते हुए पार करने से ही हम अपना अकेलापन दूर कर सकते हैं।
आपको अपने खुद के आलावा ....
और कोई चैन नहीं दे सकता....
Soo true🔥💯... Bhut khoob🔥... Keep it up🙌🏻.
ReplyDeleteThankyou so much!!
Deleteबहुत खुबसूरत लिखा सिमर ❤✨
ReplyDeleteअकेलापन और हम!
Thankyou so much!!
DeleteLove it ❤️
ReplyDeleteThankyouu!
DeleteBahut Acha likha hai Simar✨
DeleteThankyou so much!!!
Deleteबहुत सुंदर👌
ReplyDeleteThankyou so much.
Deletereality of todays life... so beautifully uhh have written in words ❤❤keep it up✨
ReplyDeleteThankyou so much!!!
DeleteAmazing👌👌
ReplyDeleteThankyou.
DeleteKeep it up!!❤
ReplyDeleteThankyou so much!
DeletePulao mein dalta hai jeera, behan meri heera…. gooooodddd jobbbbbb diduuuuu :)
ReplyDeleteThankyou so much!!
Delete🔥💕Bohot khubbb....
ReplyDelete👍🏻Keep going.....
Thankyou so much!!
DeleteBeautifully written 🥀🥀
ReplyDeleteThank you!!
DeleteThankyou so much!!
ReplyDeleteSoo true 👍🏻🔥
ReplyDeleteYesss!!
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