निर्धन वयक्तियों का लाॅकडाउन

       जिस बाज़ार में लगती थी रौनक हर दिन हर रात...
                 इन दिनों सूना वो बाज़ार हो गया!
      क्या अजब असर दिखाया इस महामारी ने अपना..
      यहॉं बड़े से बड़ा कर्मचारी भी बेरोज़गार हो गया!!



कोरोना वायरस एक भयावह स्थिति पर है, जिसके कारणवश एक खतरनाक नाम "लॉकडाउन" का लगाना आवशयक हो जाता है। लॉकडाउन का नाम सुनते ही सब सहम जाते हैं। सबके मन में इसका अब डर बैठ गया है।  

पिछले वर्ष कोविड-19 आने के बाद पूरे देश में लॉकडाउन लगाया गया था। ठीक उसी प्रकार, इस वर्ष भी '2021' में कोरोना वायरस की दूसरी लहर के आने पर भी लॉकडाउन लगाया गया है। लॉकडाउन के लगने से उत्पन्न आर्थिक विषमताएँ उन लोगों को सबसे ज़्यादा प्रभावित करती हैं, जो शायद इस महामारी की चपेट में आने से तो बच जाएंगे, लेकिन अपनी रोज़मर्रा की आवशयक ज़रूरतों का पूरा न हो पाना, उनके लिए अलग मुश्किलें खड़ी कर देता है। पिछले लॉकडाउन में जिस तरह निर्धन लोगों को ही सब मुश्किलों का सामना करना पड़ा था, इस बार भी यही लोग ही आर्थिक तंगी की चपेट में आये हैं। 


लॉकडाउन ने लाखों लोगों के जीवन में एक आर्थिक तबाही सी मचा दी है। लॉकडाउन की वजह से गरीब आदमी सबसे ज़्यादा परेशान हुआ है। आज इन लोगों के लिए एक वक़्त की रोटी का नसीब होना भी मुश्किल हो गया है। हर एक निर्धन व्यक्ति जैसे की मज़दूर, रिक्शा चालक, रेढ़ी वाले, कारखानों में काम करने वाले लोग आदि सभी को इस लॉकडाउन की वजह से सामने आई अपने परिवार के पेट भरने को लेकर कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बहुत से ऐसे लोग हैं, जिन्हें भूखे पेट ही सोना पड़ता है। सबसे ज़्यादा इन सबको ही नुकसान होता है, जो अपने परिवार का पेट पालने के लिए दिन-रात एक करके मेहनत करते हैं।  

         बीत रहा है लॉकडाउन सबका हँसी ख़ुशी के साथ            सिर्फ गरीब इंसान ही है जो इसकी चपेट में आ रहा है,
            वो न चाहते हुए भी अपने घर में बंद सा है,
                फिर भी वो अपने परिवार के साथ 
            झूठे दिलासों संग ये दिन भी बिता रहा है।। 


साथ ही कारखानों, व्यापारों के काफी समय से बंद होने के कारण, वहाँ काम करने वाले निम्न वर्ग के लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। लोगों की नौकरियाँ चली गयी हैं, जिसकी वजह से बेरोज़गारी की समस्या भी उत्पन्न हो गयी है। 


 आजकल ऐसे बहुत से गैर सरकारी संगठन, संस्थाएँ, अनेक प्रकार के समूह हैं, जो इस कठिन परिस्थिति में अपनी चिंता न किये हुए, इन लोगों के लिए खाने का इंतज़ाम कर रहे हैं, और उन्हें ज़रूरी सामान उपलब्ध करवा रहे हैं, जिससे लोगों को काफी मदद मिल रही है। पर ये लोग भी एक छोटे क्षेत्र तक ही सीमित हैं, सबतक उनका पहुँच पाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है। तो इसीलिए सरकार को इसके लिए भी कुछ कड़े कदम उठाने होंगे, ताकि सबको हर चीज़ की सहूलियत मिल सके। सरकार को देश के ऐसे सबसे गरीब और कमज़ोर लोगों की सुरक्षा के लिए जल्द ही कुछ ठोस कदम उठाने चाहिए ताकि उन्हें इस लॉकडाउन के कारण अपनी ज़िन्दगी में एक भी दिन बिना खाये या किसी भी चीज़ की कमी के कारण बिना मुस्कुराए न रहना पड़े। 

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