बदलती जीवन शैली

                        जीवन बहती नदी है 
                                  अतः 
                    हर परिस्तिथि में आगे बढ़ें!! 

जीवन शैली हमारी रोज़ की आदतों की दिनचर्या है। यह हमारे जीवन को निर्देश देती हैं। आज के समय में हर एक व्यक्ति की जीवन शैली बदल गयी है। पहले के समय में सभी आदतें बहुत अच्छी हुआ करती थी, सब एक-दूसरे के साथ मिल-जुलकर रहते थे, अच्छी-अच्छी बातें करते थे, अपनों के साथ वक़्त बिताते थे, और अपने समय का हमेशा सदुपयोग करते थे। लेकिन आजकल तो सब इससे उल्टा ही हो गया है। सबकी आदतें बदल गयी हैं और बच्चे गलत रास्तों पर जा रहे हैं। समय के साथ सब बदल गया है। 

                             बचपन में तो.. 
                      शामें भी हुआ करती थी 
                     अब तो बस सुबह के बाद 
                          रात हो जाती है!!

लोगों ने अपनी जीवन शैली खुद बदल दी है। खासकर आजकल के बच्चे, वो तो अब अपनी अलग ही दुनिया में जीते हैं। हर वक़्त सिर्फ अपने मोबाइल में ही लगे रहते हैं। पहले के समय में सब शाम को ७ बजे भोजन करके ८ बजे तक सो जाते थे, पर आजकल तो कहा जाता है कि बच्चों का दिन ही रात को ९ बजे से शुरू होता है। आजकल के बच्चों को नाईट लाइफ ज़्यादा पसंद आती है। पूरा दिन सोशल मीडिया पर लगे रहते हैं। अगर इस आदत को सही वक़्त पर बदला नहीं गया तो आगे चलकर इसका भारी नुकसान हो सकता है।

आजकल बच्चे ब्रांडेड कपड़े, सामान इत्यादि लाते हैं, जिसमें सिर्फ पैसों की बर्बादी है और कुछ नहीं। आज के समय में बाहर का खाना भी बहुत पसंद किया जाता है, घर का खाना तो अब किसी को अच्छा ही नहीं लगता। देखा जाता है की ८०%-९०% युवक बाहर का खाना ज़्यादा पसंद करते हैं। यह बहुत ही नुकसानदायक है। इससे बच्चों के स्वास्थ्य और दिमाग पर गहरा प्रभाव पड़ता है। बाहरी खाना बिमारियों का घर है। एक और नयी आदत चली है- युवक आज बहुत ज़्यादा सिगरेट और शराब वगैरह लेते हैं। इससे बच्चों के शरीर, दिमाग, स्वास्थ्य, आदि पर गहरा असर पड़ता है। 

आजकल के बच्चों में देखा जाता है कि वह बहुत ज़्यादा चिंतित रहते हैं। उनके जीवन में तनाव बहुत भरा पड़ा है। जिस उम्र में बच्चों को ज़िंदगी का आनंद लेना चाहिए, खेलना-कूदना चाहिए, उस उम्र में बच्चे चिंताओं से घिरे पड़े हैं। यह सब भी सोशल मीडिया की ही देन है, इससे बच्चों में मानसिक तनाव आ जाता है, जिससे फिर वह अपने घरवालों से, माता-पिता से भी अच्छे से बात नहीं करते हैं। 

अतः अभी तक हमने यह तो जान ही लिया है कि इक्कीसवीं सदी के बच्चों/युवकों की ज़िन्दगी कुछ अलग ही मोड़ ले चुकी है। अब न तो पहले जैसे संस्कार रहे और न ही वो बातें। आजकल बच्चे अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। किसी का आदर-सम्मान करना उन्हें लगता है कि उससे वह नीचे साबित होंगे। उन्होंने अपनी जीवन शैलियों को अपने तरीके से बदल दिया है। ये सब आदतें बहुत ही नुक्सान देने वाली है, आज नहीं तो कल, इन आदतों का बुरा असर ज़रूर देखने को मिलेगा और फिर परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। ऐसी बदलती जीवन शैली किसी के भी काम नहीं आने वाली है। बच्चे देश का भविष्य माने जाते हैं, तो उन्हें यह समझना होगा और इन गलत आदतों को छोड़ना होगा और पढ़-लिख कर अच्छे इंसान बनकर कामयाबियों को छूना होगा तथा अपने देश में तरक्की करनी होगी।  

                        जहाँ कोशिशों का कद
                              बड़ा होता है...
                          वहाँ नसीबों को भी 
                            झुकना पड़ता है...

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

मानवता

बीता समय फिर लौटता नहीं

स्वयं पर विश्वास