बाल श्रम या बाल मजदूरी

                 बच्चों को बचपन की उड़ान दे दो,
                                मजदूरी रोक,
                   उनके चेहरे पर मुस्कान दे दो !!

हमारे देश को आज़ाद हुए कितने वर्ष हो गए हैं, लेकिन बाल मजदूरी आज भी देश पर कलंक बना हुआ है। बच्चे आज भी अपने बचपन में आज़ाद नहीं हैं। बाल श्रम गैर-कानूनी होने के बावजूद भी, लोगों ने अपने व्यापार को बढ़ाने के लिए, बच्चों को मजदूर के तौर पर उनका इस्तेमाल करते हैं। बाल मजदूरी एक गंभीर विषय है, जिस पर सोचना तथा उसे रोकने के लिए कड़े कदम उठाना बहुत ज़रूरी है। बच्चों से उनका बचपन छीनना नहीं है, बल्कि उन्हें उसे जीने का अधिकार देना है। 

बाल श्रम होता क्या है? १४ वर्ष से कम उम्र के बच्चों से मजदूरी या किसी भी तरीके का काम करवाना, बाल श्रम कहलाता है। इसके बदले में उन्हें पैसे दिए जाते हैं। हॉटेल, रेस्तरां, कारखाने, दुकान आदि में बच्चों से काम करवाया जाता है, जो कि बहुत गलत है। जिस उम्र में बच्चों को खेलना चाहिए, अपने बचपन का आनंद उठाना चाहिए, उस उम्र में उन मासूमों से चंद पैसों में काम करवाया जाता है। बच्चों को उनके अधिकारों से दूर रखा जाता है और वह भी फिर मजबूर होकर काम करते हैं।

भारत के संविधान १९५० के २४वें अनुच्छेद के अनुसार किसी भी बच्चे से बाल मजदूरी करवाना दंडनीय अपराध है और अगर कोई यह करवाता हुआ पकड़ा गया तो उस पर सख्त कार्यवाई की जाएगी। परंतु इस संविधान के बाद भी लोग समझते नहीं हैं और बच्चों से मजदूरी करवाई जाती है, जो कि एक बहुत ही शर्मनाक बात है। 

              हर रोज़ ही इस जहां से जवाब मांगते हैं, 
               मन ही मन बच्चे भी किताब माँगते हैं!!

बाल श्रम के बहुत कारण हैं जो अभी हमारे देश में चल रहे हैं। सबसे बड़ा कारण है कि शिक्षा के अभाव के होने से बच्चों के माता-पिता के पास काम एवं पैसे नहीं होते, तो वह अपने बच्चों को काम पर लगा देते हैं, ताकि वे कुछ पैसे कमा सकें। लोगों ने सरकार के बने कानूनों को भी गंभीरता से नहीं लिया है। इसका सबसे मह्त्वपूर्ण कारण भ्रष्ट्राचार भी है। अगर कोई बच्चे से काम करवा भी रहा है और किसी को पता चल जाये, तो माफिया उसे घूस देकर मामले को वही खत्म कर देते हैं, जिससे बाल श्रम को और ज़्यादा बढ़ावा मिलता है। 

                    माता-पिता दुश्मन बन जाते हैं,
               जब वो नन्हें हाथों से काम करवाते हैं। 

बाल श्रम के बहुत से दुष्परिणाम हैं। इससे बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर काफी असर पड़ता है। कई बार तो  काम करवाने के लिए व्यापारी तथा माफिया लोग बच्चों का शारीरिक शोषण करते है, उन्हें अलग-अलग तरीकों से प्रताड़ित किया जाता है, जिससे वह मजबूर होकर, काम करने को विवश होते हैं। बच्चों को पढ़ाई से दूर रखा जाता है, इससे उनका भविष्य खतरे में पढ़ रहा है, जिसमें सिर्फ अंधकार ही है। बच्चों पर इतना गहरा प्रभाव बेहद चिंताजनक है। 

       जिम्मेदारी का बोझ नहीं, बचपन की मस्ती थमाएं, 
                इन बच्चों में उड़ने को पंख लगाएं!!

इन सब पर रोक लगानी बहुत ज़रूरी है ताकि हम अपने देश के भविष्य को सुरक्षित कर सकें। सबसे पहले तो उन लोगों को पकड़ना चाहिए जो बच्चों का ऐसे इस्तेमाल कर रहे हैं। अगर कहीं भी हमे कोई बच्चा काम करता हुआ नज़र आये, तो उसी वक़्त उस जगह के खिलाफ रिपोर्ट लिखवानी चाहिए। हमें हमेशा सतर्क रहना होगा कि कोई भी बच्चा मजदूरी करते हुए न दिखे। हमारा हर एक कदम, इस देश के लाखों-करोड़ों बच्चों का बचपन सुरक्षित करवा सकता है। जिन बच्चों का बचपन उनसे छीन लिया गया है, अब वह उन्हें वापिस लौटाने का समय आ गया है। जब तक हम शुरुआत नहीं करेंगे, तब तक कुछ भी होने वाला नहीं है। 

                     बाल मजदूरी जड़ से मिटायें, 
                  देश के बच्चों को शिक्षित बनाएं। 

बाल श्रम पर अंकुश लगाने के लिए सरकार द्वारा भी कुछ कार्य किये गए हैं और कुछ एक्ट्स भी बनाये गए हैं। बस ज़रूरत है कि इनको अच्छे से समझना होगा और लागू करवाना होगा। जो इन बने कानूनों को नहीं मानेगा, उसे सजा भी मिलनी चाहिए। जब तक सरकार लोगों के साथ सख्ती से पेश नहीं आएगी, लोग भी नहीं मानेंगे इसलिए सरकार को इसके लिए मजबूत होना पड़ेगा। दुनिया के हर एक बच्चे को शिक्षा प्रदान करवाना, हम सबकी ज़िम्मेदारी है। बच्चों के बचपन, जीवन, भविष्य को अंधकार में जाने से बचाने के लिए, हमारा हर एक कदम रखना बहुत ज़रूरी है। अगर आज बच्चे पढ़ेंगे-लिखेंगे, तभी कल हमारे देश का भविष्य उज्जवल होगा। बच्चों के उनसे बचपन के अधिकार को छीनने से रोकना है और अपने देश को आगे बढ़ाना है। एक बात का ध्यान हमेशा रहे- 'जब पढ़ेगा इंडिया, तभी तो आगे बढ़ेगा इंडिया!!' 

                     बर्बाद करो मत बचपन उसका,
                        मत मजदूरी करवाओ तुम 
                 अगर आज वो न काबिल बन पाया,
                       तो इंसान न कहलाओगे तुम!

Comments

  1. बहुत खूब। यही सत्य है।💯

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