बलात्कार: आखिर क्यों और कब तक?

        स्याही सूख नहीं पाती है पुराने अखबार की 

           कि खबर आ जाती है एक और बलात्कार की 


हमारे देश में हमे कई समस्याएँ देखने को मिलती हैं, लेकिन क्या कभी हमने सोचा है कि इन सब में से सबसे ज़्यादा किसकी ख़बर सुनने को मिलती है? जी हाँ...बलात्कार ही तो है वो सबसे बड़ी समस्या जिससे निकल पाना बहुत मुश्किल है और यह खबर हमे हर दूसरे दिन सुनने को मिल जाती है। हमारा भारत देश जहाँ पर नारी को देवी का अवतार समझा जाता है, नारी की पूजा की जाती है, आज उसी देश में बलात्कार कम होने की बजाय काफी बढ़ चुका है। क्या यह सही हो रहा है? क्या आज के समय में नारियों की कोई इज़्ज़त नहीं रह गयी है? 


बलात्कार की तरह-तरह की घटनाएँ आये दिन अखबारों, टी.वी.चैनलों, रेडियो, इंटरनेट आदि माध्यमों माध्यम से हम जानते हैं। क्या यह सब बस हमारे लिए जानना ही काफी है? इसे रोकने के लिए क्या हमारी कोई ज़िम्मेदारी नहीं बनती? बलात्कार क्या लगता है आपको? एक स्त्री के प्रति किसी पुरुष का जबरन शारीरिक अत्याचार या इससे भी 'कई ज़्यादा' कुछ ऐसा, जिस पर देर तक और दूर तक सोचने की ज़रूरत है? बलात्कार की स्तिथि अब दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही है। जिस भी लड़की के साथ बलात्कार होता है, उसका जीवन बर्बाद हो जाता है, समाज उस लड़की को, उसके परिवार को तरह-तरह के ताने देता है। कोई यह नहीं सोचता की इसमें उस लड़की की क्या गलती है? बल्कि अपनी लड़कियों को छोड़कर अपने लड़कों को समझाना चाहिए कि वो हर लड़की को अपनी माँ या बहन के रूप में ही देखें। 


               ये दाग जो लहू के, आँचल पर पड़े थे...

                इस ढेर में बेजान से, अरमान पड़े थे...

                  वो हूबहू इंसान से, पर इंसान न थे...

               वासना की कामना धर, हैवान खड़े थे...


हर दिन ये सब घटनाएँ सुनने को मिलती है। हाल ही में, हाथरस का केस हमारे सामने आया, उससे पहले भी दामिनी, निर्भया आदि पता नहीं कितने ही सुनने में आते हैं। कई लोगों का कहना है कि  बलात्कार टी.वी. चैनलों पर आने वाले उत्तेजित करने वाले कार्यक्रमों के कारण होते हैं यानी जब कोई पुरुष इस तरह के कार्यक्रम देखता है तो वह अपने बस में नहीं रहता और बलात्कार जैसे कुक्रत्य कर बैठता है। जब एक इंसान नशे में होता है तब भी वो ऐसे गलत काम कर देता है। कई लोग यह भी कहते हैं कि बलात्कार लड़की एवं औरतों के छोटे कपड़े पहनने की वजह से होता है। बल्कि सच तो यह है कि लोगों की सोच ही खराब है। छोटी सोच वाले लोग ही यह सब सोचते हैं और इन सब अत्याचारों को करने के लिए उत्साहित होते हैं। अगर हर मर्द अपनी नीयत को ठीक रखे और हर लड़की को सही और अच्छी नज़र से देखे, तो ऐसा कुछ कभी होगा ही नहीं। पर क्या करें, आजकल अपने माता-पिता की बात कौन सुनता है? या कौन सा लड़का संस्कारी होता है या सबको अच्छी नीयत और अच्छी नज़र से देखता है? अंत में कुछ ही लड़के होते हैं जो सही होते हैं या हर लड़की को सही नज़र से देखते हैं।


                     मर्द हो तो तुम्हारी हस्ती का 

                          इतना तो रौब हो कि 

                     बगल से निकले कोई औरत 

                            तो वो बेख़ौफ़ हो!! 


सबसे गंभीर बात तो यह भी है कि हमारा प्रशासन इन बलात्कारों को लेकर बहुत कमज़ोर है। बलात्कार की सज़ा देने के लिए क़ानून ज़रूरी रूप से सशक्त नहीं है, जिससे अपराधियों के हौसलें बढ़ते हैं। अभी का ही क्या, अभी तो पहले के कई पीड़ितों को अपने इन्साफ का इंतज़ार है। कमज़ोर क़ानून और इन्साफ मिलने में देर, यह भी बलात्कार की घटनाओं के लिए ज़िम्मेदार है। अगर सरकार एक बलात्कारी के साथ सख्त तरीके से पेश आये और उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे, तो वास्तव में बलात्कार खत्म हो सकता है।


                            ज़माना खराब है! 

                            ये सोच ही खराब है, 

                         स्त्री-स्वतंत्रता हनन का 

                              ये पहला चरण है, 

                        हर एक की सोच बदलेगी, 

                           तभी जमाना बदलेगा,

                    वरना हर रोज़ किसी निर्भया का, 

                       नाम अखबारों में निकलेगा!!





    

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

मानवता

बीता समय फिर लौटता नहीं

स्वयं पर विश्वास