भारत में शिक्षा का प्रसार

शिक्षा जीवन की सीढ़ियाँ हैं। इसके बिना आज के युग में जी पाना बहुत कठिन हो गया है। शिक्षा का प्रसार एवं प्रचार बहुत महत्वपूर्ण-सा हो गया है। आज के समय में शिक्षा के बिना कोई भी काम संभव नहीं है। शिक्षा में सिर्फ पढ़ाई या स्कूली विज्ञान नहीं आता, बल्कि इसमें माता-पिता के दिए हुए आदर्श संस्कार, दूसरों के प्रति हमारा स्वभाव आदि सब आता है। हर एक बच्चे का शिक्षित होना, एक ज़रूरत बन गयी है। पढ़े-लिखे नौजवान बच्चों की आज देश को ज़रूरत है।

भारत में शिक्षा को अलग-अलग स्तरों पर विभाजित किया गया है। माना जाता है कि हर बच्चा कम से कम बाहरवीं कक्षा तक तो पढ़ना चाहिए, ताकि भारत एक विकसित देश के अंतर्गत अपना स्थान निर्धारित कर पाए। अगर बच्चों का मन बचपन से ही पढ़ने में लग गया तो फिर उन्हें आगे बढ़ने से, तरक्की करने से कोई भी नहीं रोक सकता है। साथ ही बच्चा बीच में कोई गलत रास्ते पर ना चला जाए, इसका ध्यान भी रखना बहुत ज़रूरी है। 

सबसे पहले प्री-स्कूल स्तर आता है, जिसमें बच्चे सिर्फ खेल-कूद के माध्यम से ही चीज़ो को सीखते हैं। इसमें ज़्यादातर अमीर लोग ही अपने बच्चों का दाख़िला करवाते हैं क्योंकि इसमें पढ़ने के लिए पैसों की मॉंग बहुत ज़्यादा होती है। 
फिर आता है प्राथमिक स्तर जिसे प्राइमरी कहा जाता है। यह शिक्षा हर बच्चे के लिए लेनी सरकार द्वारा अनिवार्य मानी गयी है। 
फिर माध्यमिक स्तर आता है, इस स्तर तक आते-आते कई बच्चे शिक्षा लेनी छोड़ देते हैं, जो की बहुत गलत बात है और इसे गंभीरता से देखना बहुत ज़रूरी है। 
फिर आता है उच्च स्तर जिस तक वही बच्चे जा पाते हैं जो दिल से मेहनत करते हैं। कई निर्धन परिवार के लोग इस स्तर तक आते-आते अपने बच्चों की पढ़ाई को छुड़वा देते हैं और उन्हें काम पर लगा देते हैं। इन सबकी वजह से, परिवार के बोझ के कारण, बच्चों के भविष्य का फिर नुकसान होता है।

इन सबको रोकना होगा और सभी को पढ़ाई के लिए प्रेरित करना होगा। हर बच्चे को पढ़ाई करने का पूरा हक़ होना चाहिए और उसे सारी सेवाएँ उपलब्ध करवानी चाहिए। 
वैसे अगर देखा जाये तो, भारत में शिक्षा का स्तर बहुत नीचे है। भारत में पढ़े-लिखे बच्चों तथा नौजवानों की संख्या काफी कम है, जिससे देश का विकास बहुत धीमा हो जाता  है। 

शिक्षा के क्षेत्र में विभिन्न हितधारक भी हैं, जो बच्चों की पढ़ाई में महत्वपूर्ण भी सिद्ध होते हैं। परिवार का हाथ इसमें सबसे बड़ा होता है। शहरी परिवार के लोग अपने बच्चों को सबसे अच्छी शिक्षा प्रदान करवाते हैं, उन्हें बड़े स्कूलों में डालते हैं। ग्रामीण लोगों के पास पैसों की कमी होने के कारण, वे अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त करवाने में असफल हो जाते हैं। लेकिन कई ग्रामीण परिवार ऐसे भी होते है जो अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा प्राप्त करवाने के लिए बहुत मेहनत करते हैं ताकि उनके बच्चों को उनकी तरह ना रहना पड़े और वे पढ़ -लिख कर अपने जीवन में आगे बड़ पायें। छात्रों का भी हितधारकों के अंतर्गत बहुत अहम हिस्सा होता है, वे अगर चाहे या अच्छे से मेहनत करें तो देश की शान बन सकते हैं। बच्चों को दी गयी शिक्षा पर ही उनका व्यवहार, स्वभाव आदि निर्धारित होता है। 
भारत में विशेष ध्यान देने वाले बच्चे भी हैं। इन दिव्यांग बच्चों के लिए भारत सरकार ने अलग से निर्देश जारी किये हैं जो इनकी सुरक्षा और अच्छी पढ़ाई दोनों पर गौर देते हैं। भारत देश का शिक्षा पर व्यय कुल मिलाकर २.८% जीडीपी है जो की दूसरे देशों के मुताबिक़ बहुत कम है। 

भारत में कई जगह ऐसी हैं जहाँ शिक्षा का प्रसार नहीं हुआ है, तो इस बात को ध्यान में रखते हुए, सरकार को उन क्षेत्रों की शिक्षा का भी अनुसरण करना चाहिए। शिक्षकों की अगर बात की जाए तो कई अध्यापक बच्चों को पूरे दिल और लगन से पढ़ाते हैं, लेकिन कई सरकारी स्कूलों के अध्यापक केवल नाम के लिए ही क्लासो में जाते हैं, पढ़ाते कुछ भी नहीं और बस अपनी आय (सैलरी) से ही मतलब रखते हैं। तो सरकार को अभी शिक्षा व्यवस्था में काफी कुछ बदलने की और बहुत-सी नयी चीज़े लाने की ज़रूरत है। पाठ्यक्रम में भी अभी बहुत प्रसार लाना बाकी है। बच्चों की सुरक्षा पर बल देना बेहद ज़रूरी है ताकि हर एक बच्चा बिना किसी डर के या बिना कोई रुकावट के शिक्षा प्राप्ति का आनंद उठा सके। 

भारत की शिक्षा में प्रसार होना अभी रहता है। जब तक हर एक बच्चा पढ़ाई को पा ना सके, तब तक किसी के भी कदम रुकने नहीं चाहिए। बच्चे ही हमारे देश का भविष्य हैं, अगर यह नहीं पढ़ेंगे तो बड़े होकर अपने देश को, उसकी आर्थिक व्यवस्था को कैसे संभालेंगे। इसलिए भारत में हर एक बच्चे का विकास शिक्षा द्वारा होना बहुत महत्वपूर्ण है। देश के विकास के लिए, हर एक बच्चे का पढ़ना एवं उच्च शिक्षा को प्रदान करना, उसका अधिकार है, जो हम कभी भी नहीं रोक सकते और ना ही रोकना चाहिए। बच्चो में ही वो ताकत है और उतना आत्मविश्वास है जिससे वे अपने देश को एक नयी दिशा दे सकते हैं और हर काम को नए तरीके से करने की क्षमता रखते हैं। बच्चों की आज की पढ़ाई पर ही उनका कल का भविष्य लिखा हुआ है, इसके लिए जो भी हो सके करना चाहिए और देश को और बच्चों के भविष्य को उज्जवल करने के लिए हर एक असंभव कार्य को भी संभव बनाने का प्रयास करना होगा।

Comments

  1. बहुत सुंदर लिखा है। ऐसे ही लिखते रहो और आगे बढ़ते रहो।

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