जो हुआ अच्छा हुआ
समय के साथ हालात बदल जाते हैं,
इसलिए बदलाव में स्वयं को बदल लेना
ही बुद्धिमानी है !!
अकसर लोग कहते हैं कि जो भी मनुष्य कर्म करता है, उसी के मुताबिक उसे संसार में मान-सम्मान, यश-अपयश, लाभ-हानि आदि मिलते हैं। मनुष्य जो बीज बोयेगा, उसका फल उसे इसी जन्म में मिलेगा। मनुष्य को अपने हर एक कर्म का भुगतान खुद ही करना होता है, कोई दूसरा इसमें उसकी कोई मदद नहीं कर सकता है। मनुष्य हमेशा अच्छा काम ही करना चाहता है, जिससे उसे सारी सुख-सुविधाओं की प्राप्ति हो जाये और फिर वह चैन से रह पाए। लेकिन यह सब तो विधाता के हाथ में है, वो जैसा चाहेंगे वैसा ही होना है। उनके बिना तो कोई कुछ भी नहीं कर सकता है।
अगर कोई अपने बीते हुए बुरे परिणाम या बात को याद करता है तो परेशान होता है। लेकिन उसे यह नहीं पता होता कि जो भी हुआ होता है, वह सब अच्छे के लिए ही होता है। ईश्वर हमें कभी भी किसी के सामने झुकने नहीं देंगे। वह चाहे हमे दुख दे देते हैं लेकिन वो भी हमारे भले के लिए ही होता है। जब मनुष्य सोचता है कि अब मैंने ये काम कर लिया है तो मेरे साथ सब अच्छा ही होगा या हर सुख या संपत्ति की प्राप्ति होगी, तो यह गलत है। ईश्वर ने क्या पता हमारे लिए कुछ अलग ही सोचा हो जो हमारी सोच से भी बहुत आगे हो, तो ये सब तो भगवान के हाथ है, हम इसमें कुछ नहीं कर सकते हैं।
जिस व्यक्ति का जैसा व्यवहार होता है वैसा ही लोग उसके साथ बदले में बर्ताव करते हैं। जो गलत काम करेगा, उसे हमेशा अपशब्द ही बोले जाएंगे। कई बार मनुष्य अच्छा कर्म इसलिए भी करता है कि उसका परिणाम मान-यश बढ़ाने वाला होगा। तो वह कर्म करता है, पर कई बार उसके विरोधी पैदा होकर उसके सारे परिश्रम को व्यर्थ कर देते हैं। उसे मान की जगह अपमान और यश की जगह अपयश भोगने को फिर विवश होना पड़ता है। यह स्पष्ट है कि भगवान की मर्ज़ी के सामने, मनुष्य एकदम लाचार एवं विवश है। हमने सोचा कुछ होता है और हो कुछ और जाता है लेकिन एक बात याद रहे कि जो भी होता है, वह अच्छे के लिए तथा हमारे भले के लिए ही होता है। पिछला समय जो बीता या जो भी हमने कर्म किये, वे सब हमारे भले के लिए ही होते हैं। हमेशा सकारात्मक सोच के साथ अपने जीवन में आगे बढ़ना बहुत ज़रूरी होता है, अगर हम बीते हुए बुरे समय को ही याद करते रहे, तो अपनी ज़िन्दगी में आगे कभी भी नहीं बढ़ पाएंगे इसलिए हमेशा इसी सोच के साथ ही रहना चाहिए की जो हुआ, अच्छा ही हुआ। भगवान ने इसमें ही हमारा भला सोचा होगा।
फिर यूँ हुआ के
जो हुआ अच्छा हुआ
क्यूँकि यह
मेरे रब का फैसला था !!
इस प्रकार यह मान्यता स्वीकार कर लेनी चाहिए कि एक आदमी के हाथ में कुछ भी नही है। वह तो एक खिलौना है, जिसकी चाबी ईश्वर के हाथ में है, वे जैसे हमारी चाबी को घुमाएँगे, वैसे ही हम चलेंगे। भगवान ही हमारे विश्वकर्ता, भरता और हरता हैं। जो कुछ भी हुआ, जो कुछ भी हो या घट रहा हो और भविष्य में जो कुछ भी होना या घटना है, वह विधाता की इच्छा का ही परिणाम था, है या होगा। इसलिए कभी भी किसी भी बात से चिंता नहीं करनी है क्योंकि भगवान हमेशा हमारे साथ हैं, और वो जो हमारे लिए अच्छा होगा, वही हमसे करवाएंगे। इसलिए जो भी हमारे जीवन का हिस्सा है या कोई भी परिणाम आया है, बुरा-भला ..सब अच्छे के लिए ही हुआ होता है।
जो बीत गया उसे .....भूल जाओ
जो कर रहे हो उस पर .....विश्वास करो
कर्म का फल वक़्त देगा .....याद रखो !!
अति सुंदर लिखा है। बहुत खूब।
ReplyDeleteThankyou so much😇
DeleteGreat 😘
ReplyDeleteThankyou ♥️
DeleteSuperb
ReplyDeleteThankyou
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