विदेशी आकर्षण

             देश के सम्पूर्ण राज्यों का नाम न पता 
                       वो विदेश जा रहे हैं.....
              हाँ...संस्कृति का उपहास आसान है 
                        इसलिए अपमान किये जा रहे हैं....

हमारे देश का भविष्य आज के 'युवा' हैं। इनपर ही देश का विकास और प्रगति निर्भर है। आज जो ये करेंगे, वही आगे चलकर फल के रूप में सामने आएगा। जो आज किया जाएगा, वही हमारे देश के भविष्य को प्रफुल्लित करेगा। आज के युवाओं की पसंद/नापसंद बहुत ज़्यादा बदल गयी है। सबका खाने-पीने का स्वाद, उनके रहन-सहन के तरीके, कपड़े पहनने के तरीके आदि सब बदल गए हैं। वे अब बिलकुल अलग ढंग से रहना चाहते हैं और नए तौर-तरीके अपना रहे हैं। युवा अब अपने तरीके से सब करते हैं और उन्हें अब किसी की भी अपनी ज़िन्दगी में दखलअंदाज़ी पसंद नहीं है। 

ये माना जाता है कि हमारे देश में युवाओं को ये सब करने से रोका जाता है। उन्हें पूरे ढंग से आज़ादी नहीं मिलती है। यहाँ पर माता-पिता अपने बच्चों से बेहद लगाव रखते हैं, तो फिर उन्हें अपने तरीके से रहने का मौका नहीं मिलता। यही कारण है कि आजकल हर बच्चा या युवा विदेश जाना चाहता है। विदेश में बिना किसी रोक-टोक के वह अपनी ज़िन्दगी जीना चाहते हैं। वहाँ स्वच्छ वायु, प्रदूषण रहित वातावरण और हर तरफ हरियाली रहती है। युवा विदेश जाकर पढ़ना पसंद करते हैं ताकि उनकी अच्छी नौकरी लग सके। अगर विदेश से पढ़ाई करके किसी की भारत में नौकरी लगे तो यहाँ के लोगों से वो लोग ज़्यादा कमाते हैं। युवा अब किसी के कहने पर चलना न पसंद करके, अपनी मर्ज़ी के मालिक बन गए हैं। विदेश की हर चीज़ अब उन्हें आकर्षित करती है। माना जाता है कि अब जो विदेश से पढ़कर आता है, उसे सभी ज़्यादा आदर-सम्मान देते हैं। विदेशी पढ़ाई अब सबको लुभाने लग गयी है। विदेश जाकर बच्चे खुद को आज़ादी देना चाहते हैं। वह नहीं चाहते कि उनकी ज़िंदगी को अच्छी दिशा देने के लिए कोई उनके बीच में आये। आजकल के युवा अपनी ज़िंदगी की राहों को अपने बल पर अच्छा बनाना चाहते हैं।

विदेश जाकर वह खूब अच्छे से पढ़ते हैं और अच्छी नौकरियाँ पाते हैं। आज हर एक युवा बाहर ही जाना चाहता है, जहाँ वे अपनी मनमानी आराम से कर सकें और फिर उनपर किसी भी चीज़ का दबाव नहीं रहेगा। वहाँ वह मज़े से ज़िन्दगी गुज़ारते हैं। तो अब इन सब तर्कों से पता चलता है कि आज के समय में विदेशी आकर्षण अपने चरम पर है। आजकल तो छोटे-छोटे बच्चे भी कहते हैं कि हम बड़े होकर बाहर जाएँगे। आज तो विदेश जाना सबके लिए एक मामूली-सी बात हो गयी है। बच्चे अपना पूरा परिवार पीछे छोड़ कर खुद तो चले जाते हैं, और फिर पीछे से उनके माता-पिता उनकी याद में अपना पूरा जीवन बिता देते हैं और कई बार तो बच्चे वापिस ही नहीं आते और उनके बुज़ुर्ग माता-पिता उनके इंतेज़ार में ही रहते हैं और फिर समय आने पर यह दुनिया सिधार जाते हैं। यह बहुत दुःख की बात है और बच्चों को यह समझना चाहिए की उनका परिवार उनसे कितना प्यार करता है और उन्हें हमेशा अपनी आँखों के सामने रखना चाहता है, बच्चे अपने माता-पिता के लिए बहुत ज़रूरी हैं। यह विदेशी आकर्षण एक जादुई छड़ी की तरह है , जो सबको अपने जाल में फँसा लेती है। आज के युवा ही कल का भविष्य हैं, उन्हें अपने देश का भविष्य सुरक्षित रखते हुए विदेश नहीं जाना चाहिए और यहीं अपने देश में ही उच्च शिक्षा प्रदान करके अपने और देश के भविष्य को उज्जवल करना चाहिए। 
                        किसान फंदों पर झूल रहे, 
                    सियासत वाले जीत पर झूम रहे, 
                                 "अच्छे दिन"
     भी बेवफ़ा निकले विदेश के चक्कर में देश भूल रहे!! 
             
             

Comments

  1. वाह बहुत सुंदर लिखा है। एकदम सत्य।

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